आस्था का महाकुंभ: माघ मेले के पावन पर्व पर त्रिवेणी संगम में उमड़ा जनसैलाब, लाखों भक्तों ने लगाई डुबकी
By Vikas Srivastav | Updated: 20 January 2026 | Source: Religious News Desk
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश की पावन नगरी प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर माघ मेले की छटा देखते ही बन रही है। माघ मेले के विशेष स्नान पर्व के अवसर पर संगम नगरी में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि कड़ाके की ठंड भी भक्तों के उत्साह के सामने बौनी नज़र आई। सूर्योदय से पहले ही “हर-हर गंगे” और “जय माँ गंगे” के जयकारों के साथ समूचा मेला क्षेत्र भक्ति के रंग में सराबोर हो गया।
देश के कोने-कोने से आए लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र त्रिवेणी में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जन किया। संगम तट पर सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली, लेकिन अनुशासन और संयम के साथ सभी ने स्नान पर्व को संपन्न किया।
✔ ब्रह्म मुहूर्त से शुरू हुआ पावन स्नान
✔ लाखों श्रद्धालुओं की संगम में डुबकी
✔ संतों के प्रवचन और कल्पवासियों की साधना
✔ घाटों पर दान-पुण्य का विशेष आयोजन
कड़ाके की ठंड पर भारी पड़ी अटूट श्रद्धा
जनवरी की इस हाड़ कंपा देने वाली ठंड और सुबह के घने कोहरे के बावजूद श्रद्धालुओं के कदम डगमगाए नहीं। ब्रह्म मुहूर्त से ही संगम के विभिन्न घाटों पर भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक, हर कोई इस पावन अवसर का साक्षी बनने के लिए उत्साहित नजर आया।
स्नान के पश्चात श्रद्धालुओं ने तट पर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया और सूर्य देव को अर्घ्य देकर सुख-समृद्धि की कामना की। संगम की रेती पर कल्पवासियों की साधना और संतों के प्रवचनों ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया।
धार्मिक महत्व और परंपरा
हिंदू धर्म में माघ स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माघ महीने में सभी देवी-देवता संगम तट पर वास करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस पवित्र समय में त्रिवेणी में स्नान करने से मनुष्य के कायिक, वाचिक और मानसिक पापों का नाश होता है।
विशेष रूप से मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी जैसे मुख्य स्नान पर्वों पर यहाँ स्नान करना मोक्ष प्राप्ति का मार्ग माना जाता है। संगम तट पर दान-पुण्य का भी विशेष विधान है, जिसके चलते आज घाटों पर तिल, गुड़, वस्त्र और अन्न दान करने वालों का तांता लगा रहा।
सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाएँ
मेला प्रशासन और पुलिस विभाग ने भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं। मेला क्षेत्र को कई सेक्टरों में बांटा गया है और हर सेक्टर में मजिस्ट्रेट व पुलिस बल की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए स्नान घाटों पर बैरिकेडिंग की गई है ताकि कोई गहरे पानी में न जा सके।
जल पुलिस और गोताखोरों की टीमें मोटर बोट के जरिए लगातार गश्त कर रही हैं। पूरे मेला क्षेत्र में सैकड़ों सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी निगरानी हाई-टेक कंट्रोल रूम से की जा रही है। ड्रोन कैमरों के माध्यम से भीड़ की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है।
सुविधाओं का संगम
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने व्यापक प्रबंध किए हैं। घाटों पर महिलाओं के लिए अस्थाई चेंजिंग रूम बनाए गए हैं। शुद्ध पेयजल, अलाव और चिकित्सा शिविरों की व्यवस्था हर सेक्टर में उपलब्ध है।
स्वयंसेवी संगठनों द्वारा भी भक्तों के लिए चाय और खिचड़ी के स्टॉल लगाए गए हैं। कल्पवासियों के लिए विशेष शिविरों का आयोजन किया गया है, जहाँ वे एक महीने तक सात्विक जीवन जीते हुए साधना करते हैं।
संगम की यह पावन रेती न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की विविधता और एकता का भी सजीव उदाहरण पेश करती है। लाखों लोगों की मौजूदगी के बावजूद यहाँ दिखाई देने वाला अनुशासन और भक्ति भाव वास्तव में अद्भुत है।
📌 यह रिपोर्ट प्रयागराज माघ मेले के विशेष स्नान पर्व और मौके पर मौजूद श्रद्धालुओं की गतिविधियों पर आधारित है।
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