1000 साल पुराना चमत्कार! तंजावुर का मंदिर जिसे आज भी विज्ञान नहीं समझ पाया

 वृहदेश्वर मंदिरतंजावुरपत्थरों में कैद एक हजार साल पुराना रहस्य 

1000 साल का रहस्य
1000 साल का रहस्य

तमिलनाडु के तंजावुर शहर में स्थित वृहदेश्वर मंदिर (जिसे 'पेरुवुदैयार कोविलया 'राजराजेश्वरमभी कहा जाता हैदक्षिण भारत का सबसे भव्य और विशाल मंदिर है  यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है इसकी भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1000 साल से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह मंदिर शान से खड़ा है और यूनेस्को (UNESCO) ने इसे 'विश्व धरोहर' (Great Living Chola Temples) घोषित किया है 

1. इतिहास और निर्माता (History and Builder) 

  • निर्माता: इस मंदिर का निर्माण महान चोल शासक राजराज चोल प्रथम (Raja Raja Chola I) ने करवाया था 

  • निर्माण काल: इसका निर्माण कार्य 1003 ईस्वी में शुरू हुआ और 1010 ईस्वी में पूरा हुआ यानी यह मंदिर 1000 वर्ष से भी अधिक पुराना है  उद्देश्य: राजा अपनी शक्ति और भक्ति को प्रदर्शित करना चाहते थेइसलिए उन्होंने एक ऐसा मंदिर बनवाया जो 'मेतेरु' (सबसे बड़ा और ऊंचाहो 

2. वास्तुकला और बनावट (Architecture & Design) 

यह मंदिर द्रविड़ वास्तुकला का सबसे शुद्ध और उत्कृष्ट उदाहरण है ग्रेनाइट का रहस्य: यह पूरा मंदिर ग्रेनाइट (Granite) पत्थरसे बना है सबसे आश्चर्य की बात यह है कि तंजावुर के आसपास 60 किलोमीटर तक कोई पहाड़ या पत्थर की खदान नहीं हैतो फिर 1,30,000 टन ग्रेनाइट यहाँ कैसे लाया गयायह आज भी एक रहस्य है माना जाता है कि हाथियों और नावों की मदद से पत्थरों को दूर से लाया गया था बिना सीमेंट का निर्माण (Interlocking): इस मंदिर को बनाने में किसी भी तरह के चूनेगारे या सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया गया है  इसे 'इंटरलॉकिंग तकनीक'(Interlocking-system) से बनाया गया हैजिसमें पत्थरों को एक दूसरे में फंसाकर (Puzzle की तरहखड़ा किया गया है इसी तकनीक ने इसे कई भूकंपों से बचाया है 

3. मंदिर के प्रमुख आश्चर्य (Wonders of the Temple) 

कुंभम (TheCapstone) का रहस्य  मंदिर के शिखर (विमानकी ऊंचाई लगभग 216 फीट (66 मीटर) हैजो उस समय   दुनिया की सबसे ऊंची संरचनाओं में से एक थी इसके सबसे ऊपर एक विशाल पत्थर रखा गया है जिसे 'कुंभमकहते हैं यह एक ही पत्थर (Monolithic) है और इसका वजन लगभग 80 टन है रहस्य: उस समय बिना क्रेन के 216 फीट ऊपर 80 टन का पत्थर कैसे चढ़ाया गया?सिद्धांत: पुरातत्वविदों का मानना है कि इसके लिए लगभग किलोमीटर लंबा एक रैंप (ढलान वाला रास्ता) बनाया गया होगाजिस पर हाथियों द्वारा पत्थर को खींचकर ऊपर ले जाया गया  परछाई  दिखने का रहस्य (The Shadow Mystery) 

इस मंदिर के बारे में एक प्रचलित मान्यता है कि इसके मुख्य शिखर (विमानकी परछाई (Shadow) कभी जमीन पर नहीं पड़ती 

  • सच्चाई: विज्ञान के अनुसारपरछाई पड़ती हैलेकिन मंदिर का आधार (Base) इतना विशाल है और शिखर की बनावट ऐसी है कि परछाई अक्सर मंदिर के आधार पर ही गिर जाती हैजिससे वह जमीन पर दिखाई नहीं देती 

विशाल नंदी (Massive Nandi) मंदिर के प्रवेश द्वार पर एक विशाल नंदी बैल की मूर्ति स्थापित है यह एक ही पत्थर को तराशकर बनाई गई             है इसकी ऊंचाई लगभग 13 फीट और लंबाई 16 फीट है यह भारत में नंदी की दूसरी सबसे बड़ी मूर्ति मानी जाती है 

4. मुख्य देवता (The Deity) 

मंदिर के गर्भगृह में एक विशाल शिवलिंग स्थापित हैयह भी अखंड पत्थर से बना है और इसकी ऊंचाई लगभग 29 फीट (नीचे से ऊपर तकहै इसे चोल राजाओं के कुलदेवता के रूप में पूजा जाता है 

5. चित्रकला और शिलालेख (Frescoes and Inscriptions) 

मंदिर की दीवारों पर चोल काल के बेहतरीन भित्ति चित्र (Frescoes) बने हैं साथ हीदीवारों पर तमिल और संस्कृत में बहुत सारे शिलालेख खुदे हुए हैंजो उस समय के समाजनर्तकियोंरसोइयों और राजा द्वारा दिए गए दान का पूरा हिसाब-किताब बताते हैं 

6. कैसे पहुंचें? (How to Reach) 

  • वायु मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा त्रिची (Tiruchirappalli) हैजो यहाँ से लगभग 55 किमी दूर है 

  • रेल मार्ग: तंजावुर जंक्शन देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है 

  • सड़क मार्ग: चेन्नईमदुरै और त्रिची से बसें आसानी से उपलब्ध हैं 

  • समय: मंदिर सुबह 6 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और फिर शाम 4 बजे से रात 8:30 बजे तक खुला रहता है 


वृहदेश्वर मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं हैबल्कि यह प्राचीन भारतीय इंजीनियरों की बुद्धिमत्ता का प्रमाण है 1000 साल पहलेबिना आधुनिक मशीनों के ऐसा ढांचा खड़ा करनाजो आज भी अडिग हैमानव इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है 



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