विशेष लेख: भारतीय बैडमिंटन की क्रांति का दूसरा नाम – साइना नेहवाल
By Vikas Srivastav | Updated: 21 January 2026 | Source: Sports Feature Desk
नई दिल्ली: भारतीय खेल जगत के इतिहास में कुछ खिलाड़ी ऐसे होते हैं जो केवल पदक नहीं जीतते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक नया रास्ता बनाते हैं। साइना नेहवाल एक ऐसा ही नाम है, जिन्होंने भारत में बैडमिंटन को क्रिकेट के बाद सबसे लोकप्रिय खेलों की कतार में लाकर खड़ा कर दिया।
✔ भारत की पहली महिला बैडमिंटन सुपरस्टार
✔ ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय शटलर
✔ विश्व नंबर-1 रैंक हासिल करने वाली दूसरी भारतीय
✔ नई पीढ़ी की प्रेरणास्रोत खिलाड़ी
1. शुरुआती संघर्ष और फौलादी इरादे
17 मार्च 1990 को हरियाणा के हिसार में जन्मी साइना के रगों में बैडमिंटन पहले से ही दौड़ रहा था। उनके पिता डॉ. हरवीर सिंह और माँ उषा रानी दोनों ही बैडमिंटन खिलाड़ी थे।
जब साइना का परिवार हैदराबाद शिफ्ट हुआ, तो वहीं से उनके पेशेवर सफर की शुरुआत हुई। कम ही लोग जानते हैं कि साइना ने शुरुआत में कराटे भी सीखा था, जहाँ उन्होंने ब्राउन बेल्ट हासिल की थी।
लेकिन किस्मत ने उनके लिए बैडमिंटन कोर्ट चुना था। कोच पुलेला गोपीचंद के मार्गदर्शन में उनकी कड़ी मेहनत ने उन्हें बहुत कम उम्र में ही सुर्खियों में ला दिया।
2. अंतरराष्ट्रीय पटल पर पहली ‘धमक’
साइना नेहवाल के करियर का ग्राफ साल 2006 से तेजी से बढ़ना शुरू हुआ, जब उन्होंने फिलीपींस ओपन जीतकर दुनिया को हैरान कर दिया।
वह सुपर सीरीज टूर्नामेंट जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं, जब उन्होंने 2009 में इंडोनेशिया ओपन का खिताब अपने नाम किया।
साइना ने चीनी खिलाड़ियों के उस वर्चस्व को तोड़ा, जिन्हें उस दौर में हराना नामुमकिन माना जाता था। उनकी आक्रामक शैली और नेट पर उनकी फुर्ती ने उन्हें दुनिया की सबसे खतरनाक खिलाड़ियों में से एक बना दिया।
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3. लंदन ओलंपिक 2012: इतिहास के पन्नों में दर्ज स्वर्णिम क्षण
साइना के करियर का सबसे बड़ा और यादगार लम्हा 2012 के लंदन ओलंपिक में आया।
पूरा देश उम्मीदें लगाए बैठा था और साइना ने उन उम्मीदों को टूटने नहीं दिया। उन्होंने कांस्य पदक (Bronze Medal) जीतकर वह कर दिखाया जो आज तक कोई भारतीय शटलर नहीं कर पाया था।
यह पदक भारत में बैडमिंटन के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जिसने पीवी सिंधु जैसी खिलाड़ियों को प्रेरित किया।
4. विश्व की नंबर-1 खिलाड़ी का ताज
वर्ष 2015 साइना के लिए व्यक्तिगत रूप से सबसे सफल साल रहा।
मार्च 2015 में इंडिया ओपन का खिताब जीतने के साथ ही वह BWF विश्व रैंकिंग में नंबर-1 के स्थान पर पहुँच गईं।
प्रकाश पादुकोण के बाद यह मुकाम हासिल करने वाली वह केवल दूसरी भारतीय बनीं।
उसी वर्ष उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर अपनी बादशाहत साबित की।
5. प्रमुख उपलब्धियां और पुरस्कारों का अंबार
साइना नेहवाल का करियर रिकॉर्ड्स की एक लंबी फेहरिस्त है:
- राष्ट्रमंडल खेल (Commonwealth Games): 2010 और 2018 में एकल स्वर्ण पदक
- प्रमुख खिताब: ऑस्ट्रेलिया ओपन, हांगकांग ओपन, चाइना ओपन सहित 24+ अंतरराष्ट्रीय खिताब
- राष्ट्रीय सम्मान: मेजर ध्यानचंद खेल रत्न (2010), पद्म श्री (2010), पद्म भूषण (2016)
6. संघर्ष और संन्यास: एक महान युग का अंत
अपने करियर के अंतिम वर्षों में साइना को कई चोटों और फिटनेस समस्याओं से जूझना पड़ा।
लगातार ऑपरेशनों और रिहैब के बावजूद उन्होंने वापसी की कोशिश की, लेकिन उनका स्वर्णिम दौर धीरे-धीरे ढलने लगा।
आखिरकार उन्होंने पेशेवर बैडमिंटन से संन्यास लेकर एक महान युग का अंत कर दिया।
हालाँकि, कोर्ट से दूर जाने के बाद भी साइना नेहवाल भारतीय बैडमिंटन की आत्मा बनी हुई हैं।
भारतीय खेल इतिहास की अमर नायिका
साइना नेहवाल सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक आंदोलन हैं।
उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे फौलादी हों और मेहनत सच्ची, तो कोई भी लड़की दुनिया की नंबर-1 खिलाड़ी बन सकती है।
आज भी लाखों युवा खिलाड़ी उन्हें देखकर रैकेट उठाते हैं — और यही उनकी सबसे बड़ी जीत है।
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