काशी विश्वनाथ मंदिर: जहाँ मौत भी मोक्ष बन जाती है — पूरा सच जानिए
1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संघर्ष का इतिहास
काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास जितना प्राचीन है, उतना ही उतार-चढ़ाव भरा भी रहा है। मान्यताओं के अनुसार, काशी दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक है, जिसे भगवान शिव ने स्वयं बसाया था।
• विनाश और पुनर्निर्माण: इस मंदिर को इतिहास में कई बार विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा नष्ट किया गया। 1194 ईस्वी में कुतुबुद्दीन ऐबक और बाद में औरंगजेब द्वारा इसे काफी नुकसान पहुँचाया गया।
• अहिल्याबाई होल्कर का योगदान: मंदिर के वर्तमान ढांचे का निर्माण 1780 ईस्वी में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था।
• महाराजा रणजीत सिंह का दान: 1839 में पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर के शिखर को सोने से मढ़ने के लिए लगभग 1000 किलोग्राम सोना दान किया था।
2. आध्यात्मिक महत्व: मोक्ष की नगरी
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, काशी वह नगरी है जहाँ स्वयं भगवान शिव मृत्यु के समय भक्त के कान में 'तारक मंत्र' फूंकते हैं, जिससे जीव को जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति (मोक्ष) मिल जाती है।
• ज्योतिर्लिंग: यहाँ भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हैं। कहा जाता है कि एक बार दर्शन मात्र से ही सारे पाप धुल जाते हैं।
• अविमुक्त क्षेत्र: काशी को 'अविमुक्त क्षेत्र' कहा जाता है, जिसका अर्थ है वह स्थान जिसे भगवान शिव कभी नहीं छोड़ते।
3. काशी विश्वनाथ कॉरिडोर (Kashi Vishwanath Corridor)
दिसंबर 2021 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा काशी विश्वनाथ धाम (कॉरिडोर) का उद्घाटन किया गया, जिसने मंदिर के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है।
• गंगा से सीधा जुड़ाव: पहले मंदिर तंग गलियों के बीच घिरा था, लेकिन अब कॉरिडोर के माध्यम से मंदिर सीधे ललिता घाट और मणिकर्णिका घाट से जुड़ गया है। अब श्रद्धालु गंगा स्नान कर सीधे मंदिर तक पैदल आ सकते हैं।
• विशाल परिसर: कॉरिडोर बनने के बाद मंदिर परिसर का क्षेत्रफल 3,000 वर्ग फुट से बढ़कर लगभग 5 लाख वर्ग फुट हो गया है। यहाँ संग्रहालय, पुस्तकालय, यात्री सुविधा केंद्र और आध्यात्मिक केंद्र बनाए गए हैं।
4. मंदिर की वास्तुकला और दर्शन
मंदिर का शिखर 15.5 मीटर ऊंचा है और सोने की परत से ढका हुआ है।
• गर्भ गृह: मंदिर के भीतर चांदी के पात्र में स्थापित शिवलिंग (विश्वेश्वर) के दर्शन होते हैं। भक्त यहाँ जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक करते हैं।
• आरती: यहाँ की सप्त ऋषि आरती, भोग आरती और शयन आरती अत्यंत प्रसिद्ध हैं।
5. यात्रा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी
• सर्वश्रेष्ठ समय: अक्टूबर से मार्च (महाशिवरात्रि सबसे बड़ा उत्सव)।
• कैसे पहुँचें: वाराणसी एयरपोर्ट और वाराणसी जंक्शन रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक हैं।
• प्रमुख घाट: दशाश्वमेध घाट गंगा आरती के लिए प्रसिद्ध है।
विशेष नियम और सावधानियाँ
• सुरक्षा: मंदिर में कड़ी सुरक्षा जांच होती है। मोबाइल, स्मार्ट वॉच और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अंदर ले जाना मना है।
• ड्रेस कोड: श्रद्धालुओं को शालीन और पारंपरिक कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है।
• ऑनलाइन सेवा: सुगम दर्शन या आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा उपलब्ध है।
काशी विश्वनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। गंगा की लहरें, घाटों की संध्या आरती और मंदिर की घंटियों की ध्वनि मिलकर काशी को एक ऐसा आध्यात्मिक अनुभव बनाती है जिसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है।
FAQs – काशी विश्वनाथ मंदिर से जुड़े सामान्य प्रश्न
काशी विश्वनाथ मंदिर किस देवता को समर्पित है?
काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
काशी विश्वनाथ मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी (बनारस) शहर में गंगा नदी के पश्चिमी तट पर स्थित है।
क्या काशी विश्वनाथ मंदिर में मोबाइल ले जाना अनुमति है?
नहीं, मंदिर परिसर में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाना प्रतिबंधित है।
काशी विश्वनाथ मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
अक्टूबर से मार्च का समय सबसे अच्छा माना जाता है। महाशिवरात्रि पर यहाँ विशेष आयोजन होते हैं।
क्या ऑनलाइन दर्शन बुकिंग की सुविधा उपलब्ध है?
हाँ, सुगम दर्शन और आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा उपलब्ध है।
